आज के कारोबारी सत्र में चांदी के बाजार ने निवेशकों को चौंका दिया। दिन की शुरुआत जहां सामान्य उतार-चढ़ाव के साथ हुई, वहीं आगे बढ़ते कारोबार में बिकवाली का दबाव इतना तेज हो गया कि चांदी की कीमतों में बड़ी कमजोरी देखने को मिली। इस गिरावट ने न सिर्फ शॉर्ट टर्म ट्रेडरों बल्कि लंबी अवधि के निवेशकों को भी सतर्क कर दिया है।
चांदी को आम तौर पर दो वजहों से खरीदा जाता है—एक निवेश के रूप में और दूसरा इंडस्ट्रियल उपयोग के कारण। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, मेडिकल उपकरण और कई आधुनिक उद्योगों में चांदी की अहम भूमिका है। इसलिए जब भी वैश्विक आर्थिक संकेतकों में बदलाव आता है, उसका असर सीधे चांदी की मांग और कीमत पर दिखता है। आज का कारोबारी दिन भी कुछ ऐसा ही संकेत देता नजर आया, जहाँ मांग कमजोर और मुनाफावसूली हावी रही।
कितना है अनुमान
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के पीछे कई फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। जब निवेशकों को सुरक्षित और ब्याज देने वाले विकल्प आकर्षक लगने लगते हैं, तो वे अक्सर सोना-चांदी जैसी धातुओं से पैसा निकालकर दूसरी जगह लगाते हैं। इसका असर कीमतों पर तेज गिरावट के रूप में दिखाई देता है।
इसके अलावा कमोडिटी बाजार में तकनीकी स्तरों का टूटना भी गिरावट को बढ़ा देता है। जैसे ही कुछ अहम सपोर्ट स्तर टूटते हैं, ऑटोमैटिक सेलिंग बढ़ जाती है और गिरावट तेज हो जाती है। आज के कारोबार में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां शुरुआती कमजोरी बाद में बड़ी गिरावट में बदल गई।
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खरीदारी का सही समय
छोटे निवेशकों के लिए यह स्थिति थोड़ी असमंजस वाली हो सकती है। कई लोग सोच रहे होंगे कि क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है या अभी और कमजोरी आ सकती है। आम तौर पर चांदी का स्वभाव सोने से ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला होता है। जब बाजार ऊपर जाता है तो चांदी तेज भागती है, लेकिन गिरावट में भी यह ज्यादा फिसल सकती है। इसलिए इसमें निवेश करते समय धैर्य और सही रणनीति दोनों जरूरी होते हैं।
कुछ जानकारों का मानना है कि मौजूदा कमजोरी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए धीरे-धीरे पोजीशन बनाने का अवसर हो सकती है, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर वैश्विक आर्थिक माहौल स्थिर होता है और इंडस्ट्रियल मांग में सुधार आता है, तो चांदी दोबारा मजबूती दिखा सकती है। वहीं, अगर डॉलर और ब्याज दरों का दबाव बना रहा, तो कीमतों में और नरमी भी देखने को मिल सकती है।
इस गिरावट का असर ज्वेलरी और रिटेल खरीदारों पर भी पड़ सकता है। जब कीमतें नीचे आती हैं तो आम खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ती है, जिससे फिजिकल डिमांड में सुधार हो सकता है। हालांकि बड़े निवेशक आम तौर पर जल्दबाजी में कदम नहीं उठाते, वे बाजार के स्थिर होने का इंतजार करते हैं।
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बाजार जोखिम
ट्रेडरों के लिए आज का दिन जोखिम भरा रहा। तेज मूवमेंट के कारण कई लोगों के स्टॉप लॉस हिट हुए, जबकि कुछ ने गिरावट का फायदा उठाकर शॉर्ट पोजीशन से मुनाफा कमाया। ऐसे दिनों में भावनाओं के आधार पर ट्रेड करने के बजाय तय रणनीति पर टिके रहना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
आगे की राह पूरी तरह वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। महंगाई के आंकड़े, केंद्रीय बैंकों के फैसले, डॉलर इंडेक्स की चाल और इंडस्ट्रियल सेक्टर की मांग—ये सभी मिलकर तय करेंगे कि चांदी में अगला बड़ा मूव किस दिशा में होगा। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए बाजार पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।
एक्सपर्ट राय
निष्कर्ष रूप में कहा जाए तो आज की गिरावट ने चांदी की चमक जरूर फीकी की है, लेकिन यह कहानी का अंत नहीं है। कीमती धातुओं का बाजार हमेशा चक्रों में चलता है। कमजोरी के दौर के बाद अक्सर मजबूती भी आती है। समझदारी इसी में है कि निवेशक अपने लक्ष्य, समयावधि और जोखिम क्षमता के अनुसार फैसले लें, न कि सिर्फ एक दिन की बड़ी गिरावट देखकर घबराएं या उत्साहित हों।
Disclaimer | यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे निवेश की सलाह न माना जाए। कमोडिटी बाजार में निवेश जोखिम भरा हो सकता है। कोई भी निवेश या ट्रेडिंग निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
